रहीम के दोहे:पुरषार्थ करना अपने हाथ में परिणाम नहीं

जेहि रहीम तन मन लियो, कियों हिए बिच भीन
तासों दुख सुख कहन की, रही बात अब कौन
कवि रहीम का कथन है कि जिस व्यक्ति ने तन मन पर अधिकार कर लिया है, उसने हृदय में स्थान बना लिया है, ऐसे प्रेमी से दुख, सुख कहने की अब कौन सी बात शेष रह गयी .
निज [...]

ख्याल और जिंदगी-हिन्दी साहित्य कविता

बरसों साथ पलता है ख्याल मन में
पर जब सच होकर सामने आता
पर जो देखते थे तब भी नजर नहीं आता
घड़ी का काँटा चलता जाये
मौसम भी बदलता जाये
पर हम खडे रहते वहीं
जहाँ हमारा ख्याल हमें ठहराता
कई बरस तक रहता है कोई ख्याल
जब सामने आता है तो
खुद ही होते बेहाल
उसका रूप वैसा नहीं होता
कभी-कभी तो उजड़ा [...]

चाणक्य नीति:क्रोध है यमराज के समान

1.क्रोध यमराज के समान है, उसके कारण मनुष्य मृत्यु की गोद में चला जाता है। तृष्णा वैतरणी नदी की तरह है जिसके कारण मनुष्य को सदैव कष्ट उठाने पड़ते हैं। विद्या कामधेनु के समान है । मनुष्य अगर भलीभांति शिक्षा प्राप्त करे को वह कहीं भी और कभी भी फल प्रदान कर सकती है।
2.संतोष नन्दन [...]

चाणक्य नीति:कार्य सिद्धि बगुले से सीखें

१.चलती हुई बैलगाडी से पांच हाथ, घोडे से दस हाथ और हाथी से सौ हाथ दूर रहें.
2. यदि आप सफलता हासिल करना चाहते हैं तो गोपनीयता रखना सीख लें. जब किसी कार्य की सिद्धि के लिए कोई योजना बना रहे हैं तो उसके कार्यान्वयन और सफल होने तक उसे गुप्त रखने का मन्त्र आना चाहिए. [...]

समाज को काटकर कल्याण के लिए सजाते-व्यंग्य कविता

समाज को काटकर कल्याण के लिए सजाते-व्यंग्य कविता
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समाज को टुकडों-टुकडों में बांटकर
उसे अब दिखाने के लिए वह सजाते
हर टुकड़े पर लगते मिटटी का लेप
और रंग-बिरंगा बनाते
बालक, वृद्ध, महिला, युवा, और अधेड़ के
कल्याण की लगाते तख्तिया और
उनके कल्याण के लिए बस
तरह-तरह के नारे लगाते
इन्हीं टुकडों में लोग अपनी पहचान तलाशते
स्त्री से पुरुष का
जवान से वृद्ध [...]

संत कबीर वाणी:पढ़-लिख कर खुद न समझे, दूसरे को पढाये

पढी गुनी पाठक भये, समुझाया संसार
आपन तो समुझै नहीं, वृथा गया अवतार
संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि बहुत पढ़-लिखकर दूसरों को पढाने और उपदेश देने लगे पर अपने को नहीं समझा पाए तो कोई अर्थ नहीं है क्योंकि अपना खुद का जीवन तो व्यर्थ ही जा रहा है।
भावार्थ- आज के संदर्भ में [...]

रहीम के दोहे:मूर्खों के सभा में विद्वान अधिक नहीं ठहरते

मूढ़ मंडली में सुजन, ठहरत नहीं बिसेषि
स्याम कचन में सेत ज्यों, दूर कीजिअत देखि
कविवर रहीम कहते हैं की जैसे काले केशों में कोई सफ़ेद बाल देखकर उसे निकल देता है, उसी प्रकार मूर्खों की सभा में चतुर पुरुष बहुत समय तक नहीं रुक पाता.
जद्यपि अवनि अनेक सुख, तोव तासु रसताल
सतत तुलसी मानसर, [...]

नस्लवाद से लड़ते हुए भारत ने डेविस कप खोया था

सिडनी टेस्ट पर उठे विवाद का पटाक्षेप हो गया है, पर यह संतोषजनक नहीं है। इसमें भारतीय खिलाडियों पर नस्लभेद का आरोप लगाया गया है जो बहुत गंभीर है। एक बात याद रखने वाली बात यह है कि आस्ट्रेलिया के गोरे समाज से जुडे खिलाडियों ने यह आरोप बहुत चालाकी से अपने यहाँ के आदिवासियों [...]