Posted by: दीपक भारतदीप on: January 27, 2008
1.क्रोध यमराज के समान है, उसके कारण मनुष्य मृत्यु की गोद में चला जाता है। तृष्णा वैतरणी नदी की तरह है जिसके कारण मनुष्य को सदैव कष्ट उठाने पड़ते हैं। विद्या कामधेनु के समान है । मनुष्य अगर भलीभांति शिक्षा प्राप्त करे को वह कहीं भी और कभी भी फल प्रदान कर सकती है।
2.संतोष नन्दन वन के समान है। मनुष्य अगर अपने अन्दर उसे स्थापित करे तो उसे वैसे ही सुख मिलेगा जैसे नन्दन वन में मिलता है।
नोट-यह पत्रिका कहीं भी लिंक कर दिखाने की अनुमति नहीं है. दीपक भारतदीप, ग्वालियर
1 | jagjeet singh
July 18, 2009 at 8:25 am
SIR,
FIRST TIME WHILE SURFING I GOT SOME AMAZING WRITING OF YOU WHICH IS AMAZING AND INTRESTING SO AS I AM NOT WELL VERSED WITH COMPUTER AND WANT TO BE IN TOUCH WITH YOU REGULARLY SO IT CAN BE EASY TO BE IN TOUCH
LET ME KNOW SOON THE PROCESS
BEST REGARDS
JAGJEET SINGH