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रहीम के दोहे:पुरषार्थ करना अपने हाथ में परिणाम नहीं

Posted by: दीपक भारतदीप on: January 30, 2008

जेहि रहीम तन मन लियो, कियों हिए बिच भीन
तासों दुख सुख कहन की, रही बात अब कौन

कवि रहीम का कथन है कि जिस व्यक्ति ने तन मन पर अधिकार कर लिया है, उसने हृदय में स्थान बना लिया है, ऐसे प्रेमी से दुख, सुख कहने की अब कौन सी बात शेष रह गयी .

निज कर क्रिया रहीम कहीं, सुधि भावी के हाथ
पाँसे अपने हाथ में, दांव न अपने हाथ

कवि रहीम कहते हैं कि अपने हाथ में तो कर्म करना है परिणाम भविष्य के गर्भ में है जैसे जुआरी के हाथ में खेल के पाँसे कौडी तो अपने हाथ में होते हैं, परन्तु दाव अपने वश में नहीं होता.

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