तुम दृष्टा बन जाओ-कविता साहित्य

भीड़ में अपनों की तलाश
अपनों में आत्मीय की तलाश
कभी भी नहीं होती पूरी
दिल होता निराश
बाजार में खरीदने-बेचने निकले
क्यों करें सम्मान की आस
बिचोलियों से ही चलता बाजार
क्या अच्छा क्या बुरा
चीजों के होते अपने दाम
बेचो या खरीदों
धंधे हैं जिनके उनके लिए
सौदेबाजी के अलावा और क्या होता उनका काम
हाट में क्यों करें सम्मान की तलाश [...]