अपना अहंकार दिखाते-कविता साहित्य
Posted on February 12, 2008 by दीपक भारतदीप
मेरा लिखा शब्द तेरे लिखे शब्द से भारी
मैंने जो पढा व्याकरण
तेरी भाषा भी उसमें सिमट जायेगी सारी
मेरी भाषा का तू भी हो जा आज्ञाकारी
ऐसी सोचे वाले कहते हैं कि
‘जैसा हम कहते हैं वैसा तू लिख
जैसा चाहें वैसा तू दिख’
अपने अहंकार की देखी
कई बार नाकामी
दो हजार सात तक [...]
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