*** दीपक भारतदीप की जागरण-पत्रिका*** ***mastram Deepak Bharatdeep ki hindi Jagran Patrika***

कागज़ पर कलम से जूते न सजाओ-व्यंग्य कविता

Posted by: दीपक भारतदीप on: April 24, 2009


अपनी कलम से कागज पर
काली स्याही से जूता शब्द
बार बार इस तरह न सजाओ
कि आकाश से झुंड के झुंड बरसने लगे।
इस नीली छतरी के नीचे
तुम्हारा सिर भी घूमता है
कभी वह उस पर न चमकने लगे।

सभी भी नासिका में दो सुराख है
जहां से अच्छी हवाओं के साथ
बुरी के आने के अंदेशे भी बहुत है
जूतों की दुर्गंध से
अपनी कलम को इतना न नहलाओ
कि उसकी आदत ही हो जाये
उसे सूंघने की
और तुम्हारा दिल सुगंध को तरसने लगे

इज्जत वही है जो बीच बाजार नहीं बिकती
घर की बात घर में रहे
चाहे इंसान जितन दर्द सहे
कमीज के नीचे बनियान फटी नहीं दिखती
अपने जूते के अंदर फटे मौजे
छिपा सकते हो तभी तक
जब तक पंगत में खाने नहीं बैठे
नजर पड़ जाती है जमाने की
तब अपनी ही आंखों में अपनी बेइज्जती दिखती
दूसरे पर उड़ते जूते देख
कभी न इतराओ
दौलत और शौहरत के साथी ही
आबरु का पहिया भी घूमता है
दुनियां की पहिये की तरह
दूसरे के बेआबरु होने पर हंसने वालों
जूते पांव तले ही सुहाते हैं
दूसरे की तरफ फैंकें जूते पर
हंसने की कोशिश मत करो
भला जूते कहां आदमी की पहचान कर पाते हैं
किसी के पांव के जूते बढ़ सकते हैं
तुम्हारी तरफ भी
क्या गुजरेगी तुम पर
जब जमाने भर के लोग मचलने लगे।

…………………………..

लेखक के अन्य ब्लाग/पत्रिकाएं भी हैं। वह अवश्य पढ़ें।
1.दीपक भारतदीप की शब्द पत्रिका
2.दीपक भारतदीप का चिंतन
3.दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान-पत्रिका
4.अनंत शब्दयोग
कवि,लेखक संपादक-दीपक भारतदीप

1 Response to "कागज़ पर कलम से जूते न सजाओ-व्यंग्य कविता"

Deepak Jee, Wakai kafi acchha likhte hain. kavita ka sheershak bhi bilkul durust hai, Ummeed karta hoon, age bhi apkee likhi aur kavitaiyain padne ko milaingee.
Bhogwad ke is samay main bhi, apki kavitayain ek nayapan aur sadagi liye hue prateet hoti hain.
Age bhi apke blog par ana laga rahega.
Prabhatsardwal.blogspot.com

Leave a Reply

समस्त ब्लॉग/पत्रिका का संकलन यहाँ पढ़ें-

पाठकों ने सतत अपनी टिप्पणियों में यह बात लिखी है कि आपके अनेक पत्रिका/ब्लॉग हैं, इसलिए आपका नया पाठ ढूँढने में कठिनाई होती है. उनकी परेशानी को दृष्टिगत रखते हुए इस लेखक द्वारा अपने समस्त ब्लॉग/पत्रिकाओं का एक निजी संग्रहक बनाया गया है हिंद केसरी पत्रिका. अत: नियमित पाठक चाहें तो इस ब्लॉग संग्रहक का पता नोट कर लें. यहाँ नए पाठ वाला ब्लॉग सबसे ऊपर दिखाई देगा. इसके अलावा समस्त ब्लॉग/पत्रिका यहाँ एक साथ दिखाई देंगी.
दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका

लोकप्रियता का अंक

Recent Posts

Blog Stats

  • 11,297 hits