Posted by: दीपक भारतदीप on: May 25, 2009
क्यों डरे हो
काफिला लुट गया
फिर बनेगा।
यह तूफान
उड़ा ले गया तंबू
फिर तनेगा।
हार या जीत
का चक्र चलता है
खेल जमेगा।
बिखर गया
साथियों का हुजूम
फिर लगेगा।
खुद को धोखा
देने से बचे रहो
रंग जमेगा।
एक बार में
टूट गया ख्वाब
फिर बढ़ेगा।
चिपको मत
अपनी नाकामी से
मन डरेगा ।
मकसद को
जिंदा रखो जरूर
वह जमेगा।
तुम न रहे
कोई दूसरा वीर
जंग लड़ेगा।
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