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ज़िंदगी और दम-हिन्दी कविता

ज़िंदगी के रास्ते पर चलना इतना आसान नहीं जितना लोग समझ लेते हैं, यही वजह है कमजोर दिल वाले थोड़ी मुश्किल में ही अपनी दम खुद ही तोड़ देते हैं। कहें दीपक बापू आहिस्ता आहिस्ता कदम बढ़ाओ कछुए के तरह खरगोश की तरह उछलते रहना अच्छा लगता है मगर जिन कदमों से चलना है दूर [...]

तुलसी के दोहे-गुणी होने पर अहंकारी होना बिडंबनापूर्ण

           सामान्य मनुष्य अपनी प्रकृतियों के वशीभूत होकर काम करता है, जबकि ज्ञानी मनुष्य उनको पहचानते हुए अपने विवेक से किसी काम को करने या न करने का निर्णय लेता है। देखा जाये तो समाज में ज्ञानी मनुष्य अत्यंत कम होते हैं पर दूसरे की अपकीर्ति के माध्यम से स्वयं की कीर्ति अपने मुख से [...]

नववर्ष में अन्ना हजारे (अण्णा हज़ारे)और उनकी आंदोलन का क्या होगा-हिन्दी लेख

             इस वर्ष अगर राजनीतिक और खबरों का आंकलन किया जाये तो यकीनन अन्ना हजारे और उनका भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन टीवी चैनलों, समाचार पत्रों तथा इंटरनेट पर छाया रहा। चूंकि प्रचार माध्यमों के प्रकाशनों और प्रसारणों में सब तरह का मसाला बनाकर प्रस्तुत किया जाता है। इसलिये कभी गंभीर चिंत्तन तो कभी तनाव पूर्ण विवाद [...]

अमेरिकी डॉलर और भारत का रुपया-हिन्दी हास्य और व्यंग्य कविताएँ

वातानुकूलित कक्षों में बैठे लोग पसीने के भाग्यविधाता हो गये। जो सोना किसी की भूख नहीं मिटा सकता उनके लिये बेशकीमती बन गया, रोटी बनकर जीवन देने वाले गेहूं के चमकदार दाने उनकी नज़रों में मिट्टी हैं कागज के रुपये से पेट भरने वाले अमेरिकी डॉलर में खो गये। ——— एक अर्थशास्त्री ने दूसरे से [...]

राम और रावण के बीच युद्ध अवश्यंभावी था-आज दशहरा पर हिन्दी लेख (ram aur rawan ke beech yuddha avashyambhavi tha-hindi lekh on today dashahara)

         आज पूरे देश में दशहरे का त्यौहार मनाया जा रहा है। जिस दिन भगवान श्रीराम जी ने रावण का वध किया उसी दिन को ‘दशहरा पर्व के रूप में मनाया जाता है। पर्व मनाना और उससे निकले संदेश को समझना अलग अलग विषय हैं। ऐसे अवसर पर अपने इष्ट का स्मरण कर उनके चरित्र [...]

बहादुरों की असलियत-हिन्दी शायरियां (bahadri ki asaliyat-hindi shayariyan)

तुम ताक रहे हो उनके घर अपनी उम्मीद अपने हाथ में फैलाये जिनका पेट लूट के सामानों से कभी भरता नहीं है, पत्थर का ज़मीर पाले हैं वह लोग जो कभी पैदा न हुआ इसलिये मरता भी नहीं है। ———- फुर्सत नहीं है उनके पास लूट के सामान घर में भरने से, इश्तहार जरूर देते [...]

कागज़ खाने वाले शेर-हिन्दी व्यंग्य कविताएँ

लापता हो गये हाड़मांस के असली शेर, कुछ बीते इतिहास में दर्ज थे कुछ आज भी नए जमाने में   कागजों में दिख रहे हैं। पैसे, पद और प्रतिष्ठा के शिखर पर बैठे इंसान ही कागज पर अपने नाम में शेर लिख रहे हैं। ————— सुना है उनका शेर जैसा है जिगर, पर नहीं जिंदा रह [...]

भ्रष्टाचार यानि काम का शिष्टाचार-हास्य कविताएँ (bhrashtachar yani kaam ka shishtachar-hasya kavitaen)

भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन देश में चल रहा है, फिर भी यहाँ हर कोई अपनों को छल रहा है। नारों और वादों पर चलने का आदी है समाज आकाश में देखता है फरिश्ते, ज़मीन पर भुला रहा है रिश्ते, खड़ा है वही चौराहे पर रखकर अपनी दौलत अंधेरी तिजोरी में हाथ में उसके ईमानदारी का दीपक [...]

भारत आज भी सोने की चिड़िया है-हिन्दी व्यंग्य लेख (bharat aaj bhi sone ki chidiya hai-hindi vyangya lekh)

          कौन कहता है कि भारत कभी सोने की चिड़िया थी। अब यह क्यों नहीं कहते कि भारत सोने की चिड़िया है। कम से कम देश में जिस तरह महिलाओं और पुरुषों के गले से चैन लूटने की घटनायें हो रही हैं उसे तो प्रमाण मिल ही जाता है। हमें तो नहीं लगता कि शायद [...]

महंगी लंगोट-हिन्दी हास्य व्यंग्य कवितायें (mahangi langot-hindi hasya vyangya kavitaen)

बड़ों बड़ों की चाल चलन में खोट हो गयी है, फिर भी छिप जाते हैं उनको बड़प्पन की ओट हो गयी है। कहें दीपक बापू धीरे धीरे होते जा रहे हैं इस हमाम में बड़े बड़े नंगे, भूखे पेटों से होंगे उनके साथ भी कभी पंगे, ज़माना बेजार है, ईमानदारी से कमाना लगता बेकार है, [...]

सत्य और झूठ का खेल-हिन्दी व्यंग्य कविताएँ

धन, सोना, चांदी और हीरे जवाहरात आदमी के साथ मरने पर नहीं जाते हैं, पर फिर भी आम आदमी ही नहीं संत भी कहां लालच से बच पाते हैं। माया को झूठा झूठा कहते हैं ताउम्र मरने पर उनके कमरों में संपदा के भंडार भक्तों की आंखों को छकाते हैं, सत्य को जानने के दावे [...]

बाबा रामदेव की योग शिक्षा जल्दी प्रारंभ होने की कामना-हिन्दी लेख

         यह अच्छी बात है कि बाबा रामदेव ने अंततः संत समुदाय के कहने पर अनशन का त्याग दिया। वह देश में भारत स्वाभिमान यात्रा करते रहे हैं। उन्होंने इस दौरान अपने योग शिविरों का उपयोग भ्रष्टाचार तथा कालेधन के मुद्दे पर भाषण देने के लिये भी किया। हमारे जैसे योग साधकों के लिये बाबा [...]

संत कबीरदास के दोहे-भगवान के साथ चतुराई मत करो

सिहों के लेहैंड नहीं, हंसों की नहीं पांत लालों की नहीं बोरियां, साथ चलै न जमात संत शिरोमणि कबीर दास जी के कथन के अनुसार सिंहों के झुंड बनाकर नहीं चलते और हंस कभी कतार में नहीं खड़े होते। हीरों को कोई कभी बोरी में नहीं भरता। उसी तरह जो सच्चे भक्त हैं वह कभी [...]

आंदोलक पुरुष-हिन्दी लघु हास्य व्यंग्य (aandoka purush-hindi laghu hasya vyangya)

    आंदोलक पुरुष बहुत दिन से खाली बैठे थे। कोई उनको घास नहीं डाल रहा था। ऐसे में वह बाज़ार के सौदागरों के सरदार के पास पहुंच गये। उससे बोले-‘महोदय, आप तो अब काले तथा सफेद दोनों धंधों से खूब कमा रहे हैं। बहुत दिन से आपने मेरी सामाजिक संस्था को न तो चंदा दिया [...]

आंसु और मुस्कान-हिन्दी कविता (ansu aur muskan-hindi kavita)न

आंसुओ को आँखों से बाहर आने से रोके रहे, चाहे रोने के आते कितने भी मौके हंसकर देते उनको धोखे रहे, गैरों के हमलों की क्या शिकायत करते अपनों के हाथ ही हमारी खुशियों का गला घौंटे रहे। ————- ज़मीन के सौदे हो जाते हैं इंसानों के बीच कागज पर नाम बदल जाते हैं। खड़ी [...]

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