*** दीपक भारतदीप की जागरण-पत्रिका*** ***mastram Deepak Bharatdeep ki hindi Jagran Patrika***

क्षणिकाएँ और शायरी

कुछ उन्होने कहा नहीं
हमने कुछ सुना नहीं
फिर भी शोर बहुत था
उस जगह
जहाँ सजा था हाल
दुनिया भर के खास इसानों से
हम खुद ही निकल पड़े
हम आदमी थे बस यही थी एक वजह
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1 Response to "क्षणिकाएँ और शायरी"

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