कुछ इधर-उधर की-आलेख


जब अपने ब्लोग पर कोई टिप्पणीनहीं होती तो एक निराशा मन में घर कर जाती है और ऐसा लगता है कि हम व्यर्थ ही लिख रहे हैं। अगर मुझे शुरू से ही टिप्पणियाँ नहीं मिली होती तब शायद इस बारे में नहीं सोचता और न लिखता। शुरू में जब मैंने लिखना शुरू किया तो मुझे यह मालुम भी नहीं था कि इस तरह टिप्पणियाँ मिलेंगी और मैं भी लिखूंगा। फिर जब टिप्पणियाँ आनी शुरू हुईं तो मुझे हिन्दी में लिखने का आईडिया भी नहीं था। बाद में ब्लोग स्पॉट पर टाईप कर दूसरेब्लोग पर टिप्पणियाँ करने लगा। शुरू में मैं केवल औपचारिक रूप से कमेंट रखता पर अब पूरा पढ़कर उसके अंशों पर टिप्पणियाँ करता हूँ। टिप्पणियों को लेकर मेरे अन्दर कोई दुराग्रह नहीं है। जिस ब्लोग को पढता हूँ और उससे अगर प्रभावित होता हूँ तो इस बात की परवाह नहीं करता कि उस ब्लोगर ने मुझे कभी टिप्पणी दी कि नहीं और आगे देगा कि नहीं। मैंने आत्ममंथन किया और पाया कि यह विचार अपने अन्दर एक प्रकार की कुंठा पैदा करता है और उससे अपना रचना कर्म प्रभावित होता है।
मैं बहुत लिखने वालों में हूँ इसलिए यह आशा तो बिलकुल नहीं करता कि मेरे मित्र मुझे हर लिखे पर टिप्पणी दें क्योंकि मेरा यहाँ उद्देश्य अपनी बात आम पाठक तक पहुँचना है। इसके बावजूद अपनी लिखी पोस्ट पर कमेन्ट आयेगी कि नहीं मुझे पता होता है। कुछ पोस्ट लिखते ही मुझे पता लग जाता है कि इस पर कोई टिप्पणी नहीं आयेगी क्योंकि वह भले ही मेरी दृष्टि से बहुत अच्छी और उसे पढ़ने वालों की संख्या भी कमनहीं होती परउसमें कुछ ऐसी विवादस्पद बातें होतीं है कि लोग उनसे टिप्पणी करने से बचते हैं । हाँ कुछ ऐसी कवितायेँ हास्य या गंभीर सन्देश का भाव से सराबोर होतीं हैं और उनको पोस्ट करते समय मुझे पता लग जाता है कि कोई न कोई टिप्पणी जरूर आयेगी। आखिर जब मैं किसी से प्रभावित होकर दूसरों को कमेन्ट देने में परवाह नहीं करता तो कई और लोग भी हैं जो इस बात के परवाह नहीं करते कि मैं उनको कमेन्ट देता हूँ किनहीं।
अब मैं अपने लिखे पर ही अधिक ध्यान देता हूँ कि वह पढ़ने वालों को प्रभावित कर सके। कई बार कुछ लोगों को कमेन्ट न मिलने के शिकायत होती है उन्हें एक बात मैं कहना चाहता हूँ कि वह इस बात की परवाह न करें क्योंकि कमेन्ट न आना इस बात का प्रमाण नहीं है कि लोग हमसे चिढे हुए हैं या उपेक्षा कर रहे हैं। इसका कारण पोस्ट का प्रभावपूर्ण न होना भी हो सकता है और दिन और समय भी। दिन के समय ब्लोगर कम ही सक्रिय दिखते हैंकभी तो ऐसा लगता है कि सुबह और शाम अधिक उपलब्ध होते हैं दूसरे शादी और क्रिकेट के दिनों और समय में भी उनके सक्रियता कम दिखती है। ऐसे में कमेन्ट लगाने वालों की संख्या कम हो जाती है।
आखिरी बात यह कि जिन लोगों को यह शिकायत है कि कमेन्ट कम मिल रहीं है उन्हें यह भी सोचना चाहिए कि वह स्वयं कमेन्ट कितनी देते हैं। अगर उनको लगता है कि उनको कम पढा जा रहा है तो इसके लिए भी वह खुद ही जिम्मेदार हैं क्योंकि वह स्वयं भी ब्लोग को नहीं पढ़ रहे वरना उनको यह पता लगता कि यहाँ किस तरह के पाठक है और उनके प्रिय विषय क्या हैयहाँ एक बात समझ लेना चाहिऐ कि अधिकतर ब्लोगर उच्च शिक्षा प्राप्त हैं और हल्का-फुल्का लिखकर उनको प्रभावित नहीं कर सकते-भले ही कुछ लोगों को औपचारिक रूप से कमेन्ट देते हों। कुछ लोग दूसरों के ब्लोग अपने यहाँ दिखाते हैं। शीर्षक के साथ अपनी एक लाइन जोड़ देते हैं। उनको एक नहीं बारह कमेन्ट होते हैं पर जिनके ब्लोग वहाँ है उनको कोई देखता भी नहीं है। एक प्रतिष्ठत ब्लोग पर मेरे एक नहीं तीन ब्लोग के शीर्षक थे पर मेरे ब्लोग पर एक भी पाठक वहाँ से नहीं आया और उस पर पंद्रह कमेन्ट थे। मतलब यह कि जिस तरह कमेन्ट आना अच्छी रचना होने का प्रमाण नहीं है उसी तरह उसका न आना भी खराब होने का प्रमाण नहीं है। हाँ अगर बहुत अच्छी है तो कई लोग बिना हिचक कमेन्ट देंगे ही-यही सोचकर लिखता जाता हूँ। लिखना और कमेन्ट लेना-देना दो अलग विधाएं हैं अत: दोनों के बारे में अपना दृष्टिकोण अलग-अलग समय पर अलग रखना होगा। कमेन्ट लिखने के लिए हम जैसे खुद हैं वैसे ही सब हैं । हिन्दी लेखन के लिए यह एक अलग और नया विषय है और इसमें किसी से उम्मीद करने की बजाय हमें भी इसलिए लिए तैयार करना होगा। हाँ अपने लिखे पर अवश्य ध्यान दें क्योंकि यह आगे आम पाठक द्वारा भी पढा जाने वाला है अत: अपने विषय का चयन करते समय इस बात का ध्यान भी अवश्य रखें ।

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टिप्पणियाँ

  • anitakumar  On फ़रवरी 24, 2008 at 15:32

    सही कहा आप ने पता करुंगी कौन कौन से ब्लोग हैं आप के, ये सही है लिखना एक बात है और कमेंट्स लेना एक अलग विद्धा है, उस्के लिए शायद मार्केटिंग आना जरूरी है

  • neeraj rajput  On फ़रवरी 17, 2008 at 18:04

    sahi kaha apne. karm (likhte raho) karo, phal (comment) ki chinta mat karo.

  • Mired Mirage  On फ़रवरी 16, 2008 at 22:20

    आपके बहुत से ब्लॉग्स हैं और उनमें से कमसे कम एक पर मैं टिप्पणी नहीं कर पाती । वहाँ कुछ ऐसा लिखा आता है कि टिप्पणी के लिए यहाँ एकाउन्ट होना जरूरी है या ऐसा ही कुछ । जब यह कई बार हो गया तो मैं आजकल टिप्पणी नहीं कर रही ।घुघूती बासूती

  • Rachna Singh  On फ़रवरी 16, 2008 at 18:32

    post kii lenght bhi important haen aur aap yae bhi daekhae kii kadhin lakho ko kam kament miltaey haen blogging mae saahitya jaanae aur samjhne vale kam hae kyokii jyaadatar young log blogging ko ek dairy samjhtey haen

  • आशीष  On फ़रवरी 16, 2008 at 16:09

    सही कहा, विषय का चयन बहुत महत्‍वपूर्ण है

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