शैतानों के महल होते सब जगह-कविता



कई बस्तियां बसीं और उजड़ गईं
राजमहल खडे थे जहाँ
अब बकरियों के चरागाह हो गए

सर्वशक्तिमान अपनी कृपा के साथ
कहर का हथियार नहीं रखता अपने साथ
तो कौन मानता उसे
कई जगह उसका भी प्रवेश होता वर्जित
नाम लिया जाता
पर घुसने नहीं दिया जाता
नरक और स्वर्ग के दृश्य यहीं दिखते
फिर कौन ऊपर देख कर डरता
खडे रहते फरिश्ते नरक में
शैतानों के महल होते सब जगह
जो अब इतिहास के कूड़ेदान में शामिल हो गए
————————————–

चंद किताबों को पढ़कर
सबको वह सुनाते हैं
खुद चलते नहीं जिस रास्ते
वह दूसरे को बताते हैं
उपदेश देते हैं जो शांति और प्रेम का
पहले वह लोगों को लडाते हैं
फिर गुरु की भूमिका में आते हैं
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टिप्पणियाँ

  • SUNIL  On जुलाई 14, 2008 at 11:51

    Very nice, touch to my heart

  • satish karmarkar  On जुलाई 12, 2008 at 12:21

    NANGI HOTI HAI SACHHAI AUR POSHAKH PAHNE HUVE HAI SANSKRTI. DONO EK SATH NAHI DIKHATE JAMANESE YAHI CHALTA AYA HAI YE , ESE KYUN NAHI MANATE?

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