सेवा करने वाले स्वामी बन गये-हास्य व्यंग्य कविताएँ (servent and owner-hasya vyangya kavitaen


वह गिरे हुए लोगों को
उठाने का अभियान चलाते हैं
उनक करतब जोरदार लगे
इसलिये पहले से गिरे को और नीचे गिराते हैं।
……………………..
चमन में खूबसूरत फूल खिलाने
का वादा वह करते रहे।
जैसे ही माली बने
उजाड़ दिया पूरा चमन,
जहां पक्षी चहचहाते थे
वहां ला दिया खौफनाक अमन,
जब वादे की याद दिलाओ तो
कहते हैं कि
‘कुछ बनाने के लिये
पहले उजाड़ना जरूरी है
अभी तो हमारे पास समय बहुत है
इंतजार करो
कुछ दिन तक झेलो उदासी
हम पूरे करेंगे अपने शब्द
जो मालिक बनने से पहले कहे।’’
माली से खुद ही मालिक बन गये,
सेवा करने का दावा करने वाले
स्वामी होकर तन गये,
आसरा टिका दिया है उन पर
शायद पूरा हो जाये
यह सोचकर कोई क्या कहे।

………………………….

यह पाठ मूल रूप से इस ब्लाग‘शब्दलेख सारथी’ पर लिखा गया है। अन्य ब्लाग
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संकलक एवं संपादक-दीपक भारतदीप

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