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आठवी वरीयता का दूसरा प्रमाण भी साईडबार में लगाया-संपादकीय (second certificat of 8th raking)


निशांत मिश्र बहुत अच्छा लिखते हैं। उनके ब्लाग और रुचि देखकर बहुत खुशी हुई। उनका विवरण देखकर पता लगा कि वह जुलाई 2008 से सक्रिय हैं। उन्होंने इस ब्लाग को विश्व में आठवीं वरीयता प्राप्त होने के प्रमाण पर सवाल उठाये थे जो उनको इस लेखक ने भेज दिया है। उनकी टिप्पणी की वजह से ही दूसरा प्रमाण भी इस ब्लाग पर लगा दिया है ताकि यह कहा न जा सके कि किसी एक जगह से ही प्रमाण जुटाया है।
मैंने उनको बता दिया है कि एलेक्सा की टाप साईट में जाकर वह blogger.com पर क्लिक करें और site widgest में जाकर एक खाने में इस ब्लाग http://anantraj.blogspot.com का नाम टाईप करें और और फिर नीचे देखें तो उनका पता लग जायेगा कि इस ब्लाग की विश्व में आठवीं वरीयता है फिर मैंने एक दूसरी भी बेवसाईट का प्रमाण पत्र साईड बार में लगा दिया है।
दरअसल अलेक्सा की टाप साईट पर जो बेवसाईट हैं वह अपने पीछे छिपी बेवसाईटों का भी प्रतिनिधित्व करती है। अलेक्सा में उन्हीं दस वेवसाईटों का जानकारी देने के लिये भुगतान लेने की व्यवस्था है। अलबत्ता उसने अपना प्रमाण पत्र ब्लाग स्वामी को ले जाने की इजाजत दे रखी है। चूंकि इस लेखक को अपने ब्लाग से कोई आय नहीं है इसलिये उसकी जरूरत नहीं है। यह जानकारी तो स्वतंत्र मौलिक लेखकों के साथ बांटी है-इसका कोई अन्य उद्देश्य नहीं है। कहने का तात्पर्य यह है कि यह ब्लाग आठवीं वरीयता प्राप्त है। जहां तक इसके हिंदी होने का सवाल है तो हिंदी लेखक होने पर शर्मिंदगी होने की जरूरत नहीं है। दिसम्बर 2007 से सक्रिय होने के बाद इस अंतर्जाल पर बहुत कुछ समझ में आ रहा है। कोई हिंदी वेबसाईट सौ नंबर की रैंक में नहीं है-इस तरह के दावे इस लेखक को प्रभावित नहीं करते। जिन दस साईटों को सामने अलेक्सा दिखा रहा है उनको तो कोई पीट ही नहीं सकता क्योंकि वह तो अंतर्जाल का आधार स्तंभ हैं। यह हिट या फ्लाप का खेल तो उनके उपभागों का है जिसमें ब्लागर काम का एक छोटा हिस्सा यह ब्लाग/पत्रिका भी है। यही कारण है कि उस ब्लागर काम के पीछे इसको स्थान मिला हुआ है अगर भुगतान किया जाये तो इसी ब्लाग का नाम मिलेगा जैसे कि दूसरी वेबसाईट ने दिखाया है।
बहरहाल अब इस बहस को अब अन्य ब्लाग/पत्रिकाओं पर जारी रखेंगे। यह और चिंतन ब्लाग हमारे ऐसे ब्लाग हैं जो सर्वाधिक प्रिय हैं। हां, अब कोई अनंत शब्दयोग की इससे अलग वास्तविक रैंकिंग प्रमाणित करे तो अच्छा रहेगा। सबसे अधिक तो यह लेखक आभारी रहेगा क्योंकि किसी प्रकार का भ्रम तंग करता है और सच का सामना करने का उसमें साहस है। बहरहाल आठवीं वरीयता प्राप्त इस ब्लाग में नियमित रूप से लिखने का प्रयास होगा और जिसमें इस ब्लाग की प्रशंसा में कुछ नहीं लिखा जायेगा। बहरहाल इसके पिछले आलेखों में पहले ही सब स्पष्ट कर दिया गया है उनको पढ़कर ही अपनी राय कायम करें तो अधिक सुविधाजनक रहेगा।
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यह आलेख मूल रूप से इस ब्लाग ‘अनंत शब्दयोग’पर लिखा गया है । इसके अन्य कहीं प्रकाशन के लिये अनुमति नहीं हैं। इस लेखक के अन्य ब्लाग।
1.दीपक भारतदीप का चिंतन
2.दीपक भारतदीप की हिंदी-पत्रिका
3.दीपक भारतदीप की शब्दयोग-पत्रिका
4.दीपक भारतदीप शब्दज्ञान-पत्रिका

इस ब्लाग/पत्रिका को 8वीं वरीयता मिलना सामुदायिक प्रयासों का परिणाम-संपादकीय (editorial on ranking 8)


इस ब्लाग के साईड बार में जो एलेक्सा का प्रमाणपत्र लगा है उसे कहीं से कोई चुनौती नहीं मिली। यह दुनियां की आठवीं वरीयता प्राप्त ब्लाग/पत्रिका है-इस पर अब बहस की गुंजायश नहीं है। इसलिये अब इस पर अब भविष्य में अधिक गंभीरता से लिखने का प्रयास किया जायेगा। अभी तक यह लेखक केवल यही सोचकर चलता आ रहा था कि हिंदी में लिख रहे हैं इसलिये किसी अच्छे मुकाम पर पहुंचने की संभावना नहीं है पर जैसे ही यह ब्लाग/पत्रिका आठवीं वरीयता प्राप्त कर गया इसने नई संभावनाओं के संकेत दिये। हम उस पर इस ब्लाग पर चर्चा अब नहीं करेंगे।
सबसे पहले तो हम आभारी हैं निर्मला कपिला जी, विवेक सिंह जी, काजल कुमार जी, और संगीता पुरी जी के जिन्होंने दूसरे ब्लाग पर टिप्पणी देकर इस संपादकीय की रूपरेखा को बदल दिया। दरअसल इस लेखक के मन में इनकी टिप्पणियां देखकर यह विचार आया कि हिंदी ब्लाग जगत एकल प्रयासों से सफल नहीं हो सकता। यहां सफलता की पहली शर्त यह है कि आप बेहतर और स्वाभाविक रूप से लिखने का प्रयास करें और दूसरी यह है कि आप दूसरो का लिखा पढ़े और स्वयं भी उन पर टिप्पणियां करें। इसका लाभ आपके ब्लाग को भी मिलता है।
अनंत शब्दयोग ब्लाग/पत्रिका का विश्व स्तर पर आठवीं वरीयता में पहुंचना कोई एकल प्रयास नहीं है न अकेले इस ब्लाग पर लिखे पाठों का परिणाम है। इसके सहयोगी ब्लाग चिंतन, शब्दलेख सारथी, अंतर्जाल पत्रिका तथा अन्य ब्लाग/पत्रिकाओं के समर्थन का भी परिणाम है। आपके ब्लाग से दूसरी जगह से पाठक आते और जाते हैं यह ब्लाग के अंक बढ़ाता है। सच बात तो यह है कि अनंत शब्दयोग एक सामुदायिक ब्लाग होने के कारण आठवीं वरीयता में पहंुचा है क्योंकि इसके ईमेल से अन्य ब्लाग भी जुड़े हैं। इसमें हिंदी दिखाने वाले चारों फोरमों नारद, चिट्ठाजगत,ब्लागवाणी तथा हिंदी ब्लाग्स का भी योगदान है। सर्च इंजिनों में कई जगह यह फोरम केवल ब्लाग की वजह से ही पहुंचकर वह उसे वहां पाठक भी दिलवाते हैं। वैसे अब इस ब्लाग पर नियमित रूप से लिखा जायेगा क्योंकि इसके साथ ही इस ब्लाग लेखक की आगे की संभावनायें भी जुड़ी हुई हैं। इसके साथ ही इस ब्लाग पर अब अन्य ब्लाग मित्रों के भी लिंक भी बढ़ाये जायेंगे। इस अवसर पर सभी मित्रों और पाठकों का आभार व्यक्त करते हुए शुभकामनायें।
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यह आलेख मूल रूप से इस ब्लाग ‘अनंत शब्दयोग’पर लिखा गया है । इसके अन्य कहीं प्रकाशन के लिये अनुमति नहीं हैं। इस लेखक के अन्य ब्लाग।
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2.दीपक भारतदीप की हिंदी-पत्रिका
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